One-year FD rates

Bank FD Scheme : SBI सहित इन 5 बैंकों में 1 साल की FD स्क्रीन पर मिलेगा 8.5% का ब्याज, देखें पुरी डिटेल्स।

Bank FD Scheme – 1 साल की फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) में इस समय कई बैंकों—SBI सहित—ने अलग-अलग ग्राहक वर्गों के लिए आकर्षक ब्याज दरें पेश की हैं। खबरों में 8.5% तक की दर (विशेष/सीनियर-सिटीजन/लिमिटेड-पीरियड ऑफर) का उल्लेख मिलता है, जबकि सामान्य ग्राहकों के लिए यह आमतौर पर थोड़ा कम रहती है। ध्यान रहे कि ब्याज दरें बैंक-टू-बैंक बदलती हैं, समय-समय पर अपडेट होती हैं और “कौन-सी स्कीम/टेन्योर/कस्टमर-टाइप” चुना है, उस पर भी निर्भर करती हैं। 1 वर्ष की FD का फायदा ये है कि यह कम अवधि में फिक्स्ड रिटर्न देती है, साथ ही दोबारा रे-प्राइसिंग/लैडरिंग का विकल्प खुला रहता है। सुरक्षा की दृष्टि से FD पर DICGC के तहत प्रति बैंक ₹5 लाख तक जमा बीमाकृत होती है (प्रिंसिपल+इंटरेस्ट मिलाकर), इसलिए बड़े अमाउंट को अलग-अलग बैंकों में बाँटना अधिक समझदारी हो सकती है। निवेश से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट/ब्रांच नोटिस देखना, “प्रिमेच्योर पेनल्टी”, “ऑटो-रिन्यूअल”, “नॉमिनी” और “पेयआउट फ्रिक्वेंसी (मासिक/त्रैमासिक/क्यूमुलेटिव)” जैसे पॉइंट्स समझना बेहद जरूरी है, ताकि रिटर्न और लिक्विडिटी दोनों का सही संतुलन बना रहे।

One-year FD rates
One-year FD rates

किसे कितनी दर मिल सकती है: जनरल बनाम सीनियर, क्यूमुलेटिव बनाम नॉन-क्यूमुलेटिव

FD रेट्स आमतौर पर चार फैक्टर पर निर्भर दिखती हैं—(1) ग्राहक-श्रेणी: सीनियर सिटीजन को सामान्यतः 0.25%–0.75% तक अतिरिक्त ब्याज मिलता है; (2) अवधि: 1-वर्ष, 1.5-वर्ष, 2-वर्ष पर अलग-अलग स्लैब; (3) स्कीम-टाइप: स्पेशल/लिमिटेड-टेन्योर ऑफर, मैक्सिमा रेट्स; (4) पेमेण्ट मोड: क्यूमुलेटिव (त्रैमासिक/वार्षिक कंपाउंडिंग) बनाम नॉन-क्यूमुलेटिव (मासिक/त्रैमासिक पेड-आउट)। हेडलाइन 8.5% जैसी दरें अक्सर सीनियर-सिटीजन या विशेष ऑफर में दिखाई देती हैं; सामान्य ग्राहकों के लिए 1-वर्षीय बकेट में दरें प्रायः थोड़ी कम रहती हैं। क्यूमुलेटिव विकल्प में ब्याज जोड़-घट कर “इफेक्टिव एनुअल यील्ड” बढ़ जाती है; वहीं नॉन-क्यूमुलेटिव में कैश-फ़्लो नियमित मिलता है पर इफेक्टिव यील्ड थोड़ी घट सकती है। ऑफर-पीरियड और बैंक-विशिष्ट शर्तें (न्यूनतम/अधिकतम जमा, रिन्यूअल बोनस, डिजिटल-बुकिंग इंसेंटिव) रेट्स को प्रभावित करती हैं, इसलिए बुकिंग से पहले “रेट-कार्ड” और “फाइन-प्रिंट” ज़रूर देखें।

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टैक्स/TDS, 80TTB और प्रिमेच्योर नियम की पूरी समझ

FD ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ता है, इसलिए टैक्स ब्रैकेट के अनुसार उस पर टैक्स लगता है। बैंक TDS तब काटते हैं जब वित्त वर्ष में आपके FD ब्याज पर निर्धारित सीमा से ज्यादा इंटरेस्ट हो जाए—नॉन-सीनियर के लिए सामान्यत: ₹40,000 और सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000 तक की छूट (सेक्शन 80TTB) लागू हो सकती है। यदि कुल आय टैक्सेबल नहीं है, तो Form 15G/15H देना चाहिए ताकि अनावश्यक TDS न कटे। प्रिमेच्योर क्लोज़र पर आम तौर पर 0.5%–1% तक की पेनल्टी और/या नज़दीकी टेन्योर की दर लागू हो सकती है; आंशिक निकासी की सुविधा कुछ बैंकों में उपलब्ध होती है। ऑटो-रिन्यूअल ऑन हो तो मैच्योरिटी पर FD स्वत: नए रेट पर रिन्यू हो सकती है—यदि आपको धन की ज़रूरत है या बेहतर दर दिख रही है, तो “क्लोज़ एंड पेआउट” चुनें। नॉमिनी अपडेट, KYC, पैन और बैंक डिटेल्स सही होना पेआउट/NEFT में देरी से बचाता है।

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1-वर्ष FD कैसे खोलें: ऑनलाइन और ब्रांच स्टेप-बाय-स्टेप

ऑनलाइन: नेटबैंकिंग/मोबाइल ऐप में लॉगिन करें → “डिपॉज़िट/ओपन FD” → “टेन्योर: 12 महीने” चुनें → क्यूमुलेटिव/नॉन-क्यूमुलेटिव तय करें → ऑटो-रिन्यूअल/ऑटो-क्रेडिट विकल्प सेट करें → नॉमिनी जोड़ें → कन्फर्म करें। कुछ बैंक डिजिटल-बुकिंग पर अतिरिक्त 0.05% तक का इंसेंटिव देते हैं (बैंक-विशिष्ट)। ब्रांच: KYC डॉक्यूमेंट (आधार/पैन), कैंसल्ड चेक/पासबुक और राशि लेकर जाएँ; फॉर्म में टेन्योर, पेमेण्ट फ्रिक्वेंसी और नॉमिनी भरें; रसीद/FD एडवाइस सुरक्षित रखें। जरूरत हो तो “स्वीप-इन/सुपर-सेवर” जैसे फीचर चुनकर चालू खाते के साथ लिंक करें, जिससे शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी मिलती रहे। “लोन अगेंस्ट FD” भी कई बैंक 85–90% तक देते हैं—इमरजेंसी में ब्रेक करने की बजाय यह सस्ता विकल्प हो सकता है। बुकिंग के बाद “रेट-लॉक” और मैच्योरिटी इन्स्ट्रक्शन ईमेल/SMS में क्रॉस-चेक कर लें।

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स्मार्ट टिप्स: लैडरिंग, सुरक्षा और रिटर्न को ऑप्टिमाइज़ करना

पूरी राशि एक ही FD में बंद करने की बजाय लैडरिंग अपनाएँ—जैसे 3, 6 और 12 महीने की कई FDs, ताकि दरें बढ़ें तो आप चरणबद्ध री-प्राइस कर सकें, और अचानक जरूरत पर छोटी FD तोड़कर पेनल्टी/इंटरेस्ट-लॉस कम रहे। DICGC कवर प्रत्येक बैंक में ₹5 लाख तक है; बहुत बड़े अमाउंट को अलग-अलग बैंकों/स्मॉल फाइनेंस बैंकों में वितरित कर सुरक्षा और संभावित उच्च दरों का संतुलन बनाएँ। रेट-कार्ड सिर्फ हेडलाइन नहीं, “क्यूमुलेटिव बनाम मासिक पेमेण्ट” के इफेक्टिव यील्ड की तुलना करें—मासिक पेमेण्ट सुविधाजनक है, पर कुल रिटर्न थोड़ा कम दिख सकता है। टैक्स-ब्रैकेट हाई हो तो पोस्ट-टैक्स यील्ड देखें; वैकल्पिक रूप में SCSS/PPF/डेब्ट फंड भी तुलना में शामिल करें। बैंक बदलते समय प्रिमेच्योर पेनल्टी बनाम नई उच्च दर के लाभ की गणित करें। अंत में, रेट्स और शर्तें डायनैमिक हैं—बुकिंग से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट/ब्रांच नोटिस ही अंतिम, भरोसेमंद स्रोत मानेँ।

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