3 Lakh People Excluded

भूख, बेबसी और अफरा-तफरी! 3 लाख लोगों को राशन से किया बाहर – Ration Card Eligibility

Ration Card Eligibility – भूख, बेबसी और अफरा-तफरी! 3 लाख लोगों को राशन से किया बाहर – Ration Card Eligibilityदेशभर में गरीबी और भूख की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन हाल ही में सामने आई खबर ने करोड़ों गरीब परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। सरकार की नई सूची के अनुसार करीब 3 लाख लोगों को राशन कार्ड की पात्रता से बाहर कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब ये परिवार सरकारी राशन दुकानों से मिलने वाला सस्ता अनाज नहीं ले पाएंगे। इस फैसले ने उन परिवारों के बीच भूख और बेबसी की स्थिति पैदा कर दी है जो पहले से ही अपनी जरूरतें पूरी करने में संघर्ष कर रहे थे। सरकार का कहना है कि यह कदम उन लोगों को पहचानने के लिए उठाया गया है जो फर्जी तरीके से राशन कार्ड का लाभ ले रहे थे, लेकिन इस प्रक्रिया में कई असली जरूरतमंद भी कट गए हैं। लोगों में अफरा-तफरी मची हुई है और वे अपनी स्थिति को लेकर परेशान हैं। सवाल यह है कि क्या सही मायने में यह व्यवस्था गरीबों को राहत पहुंचाएगी या उनके लिए और मुश्किलें खड़ी करेगी।

3 Lakh People Excluded
3 Lakh People Excluded

राशन कार्ड से बाहर हुए लोग और उनके हालात

राशन कार्ड से बाहर किए गए परिवारों की संख्या लाखों में है और इनमें अधिकतर दिहाड़ी मजदूर, किसान और बेरोजगार शामिल हैं। उनके लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे ये परिवार सरकारी राशन पर ही निर्भर रहते थे। इन लोगों का कहना है कि अचानक से उनके नाम हटाने की वजह से उन्हें अब खुले बाजार से महंगे दाम पर अनाज खरीदना पड़ेगा, जो उनकी जेब पर और बोझ डालेगा। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों पर इसका असर गहरा पड़ेगा। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि असली हकदारों को ही लाभ पहुंचाना इस फैसले का मकसद है। हालांकि ज़मीनी हकीकत यह है कि असली गरीब परिवार अब बिना राशन के भूखे पेट रातें गुजारने को मजबूर हैं।

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सरकार का दावा और हकीकत

सरकार ने यह दावा किया है कि राशन कार्ड की पात्रता से केवल वही लोग हटाए गए हैं जिनकी आय सीमा से अधिक है या जिनके पास पहले से अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ मौजूद है। लेकिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लगातार यह शिकायत आ रही है कि वास्तविक गरीब परिवार भी इस प्रक्रिया में प्रभावित हुए हैं। कई ऐसे परिवार हैं जो मजदूरी करके गुजारा करते हैं, लेकिन उनके पास छोटे-छोटे कागज़ी रिकॉर्ड की कमी के कारण उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। हकीकत यह है कि सरकारी डेटा की कमियों और तकनीकी गड़बड़ियों ने हजारों परिवारों को संकट में डाल दिया है। राशन की लिस्ट से बाहर होना उनके लिए रोज़ाना की भूख मिटाने की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यही वजह है कि प्रभावित लोग अब अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और अपनी पात्रता साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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गरीब परिवारों पर बढ़ा बोझ

राशन कार्ड से बाहर होने के कारण गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। पहले जहां वे सस्ते दाम पर चावल, गेहूं और चीनी खरीद लेते थे, अब उन्हें वही सामान दुगने-तिगुने दाम पर लेना पड़ रहा है। इससे उनकी मासिक आय का बड़ा हिस्सा केवल खाने-पीने पर खर्च हो रहा है, जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य जरूरी चीजों पर असर पड़ रहा है। कई परिवारों ने तो कर्ज लेने तक की नौबत आने की बात कही है। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर है क्योंकि वहां कमाई के अवसर पहले से ही सीमित हैं। ऐसे हालात में सरकार की इस नीति ने आम लोगों पर और दबाव बढ़ा दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या बिना किसी ठोस जांच-पड़ताल के लाखों परिवारों को सूची से बाहर करना सही कदम है?

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समाधान और आगे का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान तुरंत निकालना जरूरी है ताकि कोई भी असली हकदार भूखा न रहे। सरकार को चाहिए कि वह राशन कार्ड सूची से बाहर किए गए परिवारों की दोबारा जांच करे और उन्हें अपील करने का अवसर दे। साथ ही, तकनीकी खामियों को दूर करके एक पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को किसी भी हाल में वंचित न होना पड़े। स्थानीय स्तर पर भी पंचायत और वार्ड अधिकारी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए ताकि वे सही परिवारों को चिन्हित कर सकें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भूख और कुपोषण जैसी समस्याएं और गहरी हो सकती हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस संकट का समाधान किस तरह से करती है और क्या असली गरीब परिवारों को फिर से उनका हक मिल पाएगा।

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