CIBIL Score Rule – CIBIL Score Rule के तहत अब लोन लेने के लिए जरूरी नियमों में बदलाव किए गए हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने नए निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत लोन के लिए आवेदन करने वालों को पहले से तय किए गए CIBIL Score की शर्तों को पूरा करना होगा। पहले जहां कम स्कोर वाले लोगों को भी आसानी से लोन मिल जाता था, वहीं अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि केवल उचित स्कोर वाले आवेदकों को ही लोन मंजूर किया जाए। इन नए नियमों का मकसद है वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और बैंकों को खराब ऋणों से बचाना। आइए जानते हैं इन बदलावों की पूरी जानकारी।

RBI के नए नियम और उनका प्रभाव
RBI द्वारा लोन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और जोखिम को कम करने के लिए पांच बड़े नियम लागू किए गए हैं। अब किसी भी बैंक से लोन पाने के लिए आवेदक का CIBIL Score एक महत्वपूर्ण आधार होगा। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनका स्कोर 700 से नीचे है। ऐसे लोग अब आसानी से लोन नहीं ले पाएंगे और उन्हें पहले अपने स्कोर को सुधारने की ज़रूरत होगी। वहीं, जिनका स्कोर अच्छा है, उन्हें लोन पर कम ब्याज दर और बेहतर शर्तों का लाभ मिलेगा। इससे वित्तीय क्षेत्र में अनुशासन और विश्वास दोनों बढ़ेंगे।
लोन लेने वालों के लिए नए अवसर
नए नियम केवल कठिनाई नहीं लाते, बल्कि उन लोगों के लिए अवसर भी हैं, जो समय पर अपने कर्ज चुकाते हैं और जिनका CIBIL Score मजबूत है। RBI ने यह सुनिश्चित किया है कि उच्च स्कोर वालों को न केवल आसानी से लोन मिलेगा, बल्कि उन्हें बेहतर क्रेडिट लिमिट भी ऑफर की जाएगी। इसका फायदा खासकर उन ग्राहकों को होगा, जो लंबे समय से वित्तीय अनुशासन का पालन कर रहे हैं। इससे लोगों को समय पर EMI भरने की प्रेरणा मिलेगी और वित्तीय बाजार में स्थिरता आएगी।
खराब स्कोर वालों के लिए चुनौतियां
जिन लोगों का CIBIL Score कम है, उनके लिए यह नियम कठिनाई खड़ी कर सकता है। कम स्कोर होने का मतलब है कि व्यक्ति ने पहले समय पर लोन या क्रेडिट कार्ड की किस्तें नहीं चुकाई हैं। ऐसे लोगों को अब नए लोन लेने के लिए पहले अपने स्कोर को सुधारने की आवश्यकता होगी। इसके लिए उन्हें पुराने बकाया चुकाने, समय पर EMI भरने और कम क्रेडिट उपयोग करने जैसे कदम उठाने होंगे। RBI का यह कदम वित्तीय अनुशासन बढ़ाने के लिए लिया गया है, ताकि गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) की समस्या कम हो सके।
आगे की संभावनाएं और उपभोक्ताओं पर असर
इन नए नियमों से एक ओर जहां वित्तीय क्षेत्र मजबूत होगा, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं के लिए अपनी क्रेडिट योग्यता बनाए रखना आवश्यक हो जाएगा। अब केवल आय और नौकरी की स्थिरता से लोन नहीं मिलेगा, बल्कि क्रेडिट इतिहास भी अहम भूमिका निभाएगा। इससे आम आदमी को अपनी वित्तीय आदतों पर और ज्यादा ध्यान देना होगा। RBI का यह कदम लंबे समय में देश की बैंकिंग व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में मदद करेगा और उपभोक्ताओं को भी वित्तीय अनुशासन में रहने के लिए प्रेरित करेगा।
