Uttarakhand Railwayline – उत्तराखंड में प्रस्तावित नई रेललाइन का सर्वेक्षण पूरा होने के बाद परियोजना निर्णायक चरण की ओर बढ़ रही है। पहाड़ और मैदानी इलाक़ों के बीच तेज़, सुरक्षित और सर्व मौसम संपर्क देने के लिए इस कॉरिडोर को रणनीतिक माना जा रहा है। शुरुआती/विस्तृत सर्वे (FLS/DPR इनपुट) के आधार पर अब विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), लागत-अनुमोदन, भूमि अधिग्रहण, तथा वन/पर्यावरण स्वीकृतियों की प्रक्रियाएँ आगे बढ़ेंगी। इस लाइन से तीर्थ और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा, बागवानी/औषधीय उत्पादों की आवाजाही आसान, विद्यार्थियों और मरीजों की यात्रा तेज़, तथा सीमांत क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर बनेंगे। परियोजना को चरणबद्ध निर्माण, लंबी सुरंगों, ऊँचे पुलों और अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों के साथ विकसित करने की योजना है, ताकि बरसात/भूस्खलन के समय भी विश्वसनीयता बनी रहे। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत 11 स्टेशनों को उन्नत सुविधाओं के लिए चुना गया है, जिससे यात्रियों को आधुनिक, स्वच्छ और समावेशी स्टेशन अनुभव मिलेगा। ध्यान रहे, कार्यान्वयन की समय-रेखा और लागत से जुड़े अंतिम निर्णय आधिकारिक स्वीकृतियों पर निर्भर करेंगे, इसलिए अपडेट के लिए रेल मंत्रालय/डिवीजन की आधिकारिक सूचनाएँ ही मान्य होंगी।

रूट, तकनीकी चुनौतियाँ और अगले कदम
पहाड़ी भूगोल के कारण रूट-एलाइनमेंट में लंबे टनल, वायाडक्ट और गहरी कटिंग जैसी इंजीनियरिंग चुनौतियाँ आती हैं। डिजाइन में भू-स्खलन प्रवण ढलानों का स्थिरीकरण, रॉक बोल्टिंग/शॉटक्रिट, रॉक-फॉल नेटिंग, उन्नत ड्रेनेज और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था शामिल होगी। भूकंपीय सक्रियता को देखते हुए संरचनात्मक डिज़ाइन भारतीय मानकों के उच्चतम सिस्मिक मानदंडों पर तैयार किए जाते हैं। ट्रैक्शन के लिए 25 kV एसी इलेक्ट्रिफिकेशन, ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (जैसे ‘कवच’), और इंटरलॉकिंग/ETCS जैसी आधुनिक सिग्नलिंग पर जोर रहेगा, ताकि गति व सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हों। प्रारम्भ में सिंगल लाइन विद क्रॉसिंग लूप्स का विकल्प अपनाया जा सकता है, भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने पर डबलिंग/थर्ड लाइन की प्रावधानशीलता रहेगी। सर्वेक्षण रिपोर्टों के आधार पर डीपीआर/बोर्ड अनुमोदन, फॉरेस्ट क्लीयरेंस, यूटिलिटी शिफ्टिंग, और ठेका प्रक्रिया क्रमशः चलेगी। बरसाती मौसम/कार्यगत बाधाओं को देखते हुए कार्य-निर्धारण “सीज़न-आधारित” होगा, जिससे गुणवत्ता और सुरक्षा पर समझौता न हो।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 11 स्टेशनों का कायाकल्प
अमृत भारत स्टेशन योजना का फोकस स्टेशनों को “मल्टी-मोडल, हरित और समावेशी” बनाना है। चयनित 11 स्टेशनों पर विस्तृत री-डेवलपमेंट में रूफ-प्लाज़ा/कॉनकोर्स, विस्तृत वेटिंग हॉल, एस्केलेटर/लिफ्ट, दिव्यांग-अनुकूल रैंप/टॉयलेट, ब्रेल/यूनिवर्सल साइनेज, और सेफ/स्मार्ट सर्कुलेशन शामिल रहेंगे। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए बस/टैक्सी/ई-रिक्शा ज़ोन, साइकिल स्टैंड और समर्पित ड्रॉप-ऑफ बे बनाए जाएंगे। ऊर्जा-कुशलता हेतु सोलर रूफटॉप, एलईडी लाइटिंग, वर्षा जल संचयन और एसटीपी आधारित जल पुनर्चक्रण की व्यवस्था होगी। बेहतर यात्री अनुभव के लिए फूड कोर्ट/रीटेल कियोस्क, चाइल्ड-केयर रूम, सीनियर-सिटिजन लाउंज, फर्स्ट-एड/हेल्थ डेस्क, और क्लीन स्टेशन कैम्पस पर बल रहेगा। सीसीटीवी, फायर सेफ्टी, एक्सेस कंट्रोल और भीड़-प्रबंधन के लिए स्मार्ट सिस्टम लगाए जाएंगे। स्थानीय शिल्प/भोज्य पदार्थों को बढ़ावा देने के लिए “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” आधारित कियोस्क/हाट स्पेस का भी प्रावधान किया जा सकता है, जिससे रोजगार व पहचान दोनों मजबूत हों।
क्षेत्रीय लाभ: पर्यटन, रोज़गार और आपदा-प्रबंधन
नई रेललाइन से यात्रा समय व परिवहन लागत में कमी आने से तीर्थ-पर्यटन, ट्रैकिंग/इको-टूरिज्म और वाइल्डलाइफ़ सर्किट तक पहुँच बेहतर होगी। पहाड़ी फल/सब्ज़ियों, जड़ी-बूटियों और हस्तशिल्प के लिए कोल्ड-चेन/लॉजिस्टिक्स आसान होगा, जिससे किसानों/कारीगरों की आमदनी में वृद्धि संभव है। विद्यार्थियों, नौकरीपेशा और मरीजों के लिए कनेक्टिविटी सुधरेगी; सड़क बंद होने पर भी वैकल्पिक यातायात उपलब्ध रहेगा। आपदा-प्रबंधन की दृष्टि से रेल-आधारित त्वरित राहत, एवैक्यूएशन और सामग्री की प्री-पोज़िशनिंग सरल होगी—स्टेशन परिसरों पर हेल्पडेस्क/इमरजेंसी मार्गदर्शन, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और चिकित्सा सहायता तक त्वरित पहुँच सुनिश्चित की जा सकती है। अनुमानतः जहाँ सड़क से लंबी दूरी 6–8 घंटे लेती है, वहीं रेल से यह समय उल्लेखनीय रूप से घट सकता है (वास्तविक समय-लाभ रूट/स्टॉपेज पर निर्भर करेंगे)। बेहतर पहुँच से होम-स्टे, गाइड सर्विस, ट्रांसपोर्ट, और स्थानीय उत्पादों की बिक्री में भी नए उद्यम उभरेंगे।
नागरिकों के लिए सुझाव: भागीदारी और तैयारी
परियोजना के अगले चरणों में जन-सुनवाई/पब्लिक कंसल्टेशन, स्टेशन एरिया डेवलपमेंट प्लान और यातायात प्रबंधन योजनाएँ आती हैं—नागरिक समय पर सुझाव/आपत्तियाँ दर्ज कराएँ, ताकि स्थानीय ज़रूरतें डिज़ाइन में समाहित हों। जिन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है, वहाँ नोटिस/क्षतिपूर्ति नियम, बैंक/केवाईसी और दस्तावेज़ (खसरा/खतौनी/म्यूटेशन) अद्यतन रखें; संदेह की स्थिति में केवल अधिकृत कार्यालय से जानकारी लें। व्यापारी/हॉकर्स पुनर्वास के विकल्प, स्किल-अपग्रेड (हॉस्पिटैलिटी/रिटेल/फूड-सेफ्टी) और स्टार्टअप-सहायता योजनाओं का लाभ उठाएँ। निर्माण अवधि में वैकल्पिक मार्ग/पार्किंग और स्कूल/अस्पताल पहुँच को लेकर समुदाय-आधारित व्यवस्था बनाना उपयोगी रहेगा। अपडेट के लिए रेल मंत्रालय, संबंधित मंडल/डिवीजन, राज्य पीआरओ और ई-टेंडर पोर्टलों की आधिकारिक घोषणाएँ फॉलो करें; अपुष्ट अफ़वाहों से बचें। स्थानीय उत्पाद/कला के लिए स्टेशन पर मिलने वाले रिटेल स्लॉट/कियोस्क नीतियों पर नज़र रखें—यही विकास को “लोकल-फर्स्ट” बनाता है और रोज़गार को टिकाऊ।
